सूर्यवंशी पर्वतदान स्मृति महामहोत्सव एवं सामूहिक विवाह कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

सूर्यवंशी पर्वतदान स्मृति महामहोत्सव एवं सामूहिक विवाह कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
रतनपुर (जिला बिलासपुर), 21 मार्च 2026।
पावन नगरी रतनपुर एक बार फिर आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता के अद्भुत संगम की साक्षी बनी, जब दो दिवसीय मेले के अंतर्गत सूर्यवंशी पर्वतदान स्मृति महामहोत्सव एवं आदर्श सामूहिक विवाह कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत एक भव्य और आकर्षक शोभायात्रा से हुई, जिसमें पर्वतदान स्मृति को सुसज्जित रथ में विराजमान कर हजारों श्रद्धालुओं ने कलश धारण कर श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया। यह विशाल यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई ऐतिहासिक महामाया मंदिर तक पहुंची।
इसके पश्चात कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित अतिथियों द्वारा महापुरुषों एवं पर्वतदान स्मृति का विधिवत पूजन-अर्चन कर आयोजन का विधिवत शुभारंभ किया गया। मंचासीन अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों से स्वागत किया गया और समाज के इतिहास, परंपरा एवं इस महोत्सव के उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

इस गरिमामयी आयोजन में सूर्यवंशी समाज लच्छनपुर सतगंवा परिक्षेत्र के सदस्यों ने भी बड़ी संख्या में सहभागिता कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर सूर्यवंशी समाज लच्छनपुर सतगंवा परिक्षेत्र से कई प्रमुख पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें अध्यक्ष श्री जगजीवन राम लाठिया, कार्यकारिणी अध्यक्ष श्री बूटीलाल सूर्यवंशी, उपाध्यक्ष श्री बेदराम सूर्यवंशी, सचिव श्री प्यारेलाल सूर्यवंशी, कोषाध्यक्ष श्री भरतलाल प्रधान, संगठन सचिव श्री श्रद्धा रोलेज, संरक्षक श्री जगदीश किरण, सांस्कृतिक सचिव श्री भूषण प्रसाद लाठिया, सलाहकार श्री फत्तूलाल सूर्यवंशी, सूचना संवाहक श्री अमृतलाल प्रधान, एवं श्री शत्रुहन प्रधान सहित अनेक गणमान्य जनों और ग्राम प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2026 के लिए प्रकाशित आधुनिक सामाजिक कैलेंडर का निःशुल्क वितरण भी किया गया, जिसका उद्देश्य समाज के संदेश और मूल्यों को घर-घर तक पहुंचाना है।

इस भव्य आयोजन ने न केवल सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती दी, बल्कि सामूहिक विवाह जैसे प्रेरणादायक आयोजन के माध्यम से समाज में एकता, सहयोग और आदर्श परंपराओं को भी प्रोत्साहित किया।
यह महामहोत्सव समाज की शक्ति, संस्कृति और संगठनात्मक एकजुटता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।



