कोसमंदा ने पेश की सामाजिक सुधार की मिसाल: मृत्यु संस्कार में मीठा और नशे पर लगी रोक, S4 अभियान को मिला जनसमर्थन

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कोसमंदा (जांजगीर-चांपा), 6 जुलाई। सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ चल रहे अभियान को उस समय नई मजबूती मिली, जब ग्राम कोसमंदा के करियारे (सूर्यवंशी) परिवार ने अपने युवा सदस्य विशाल सूर्यवंशी के परिनिर्वाण उपरांत आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को पूरी तरह सादगी, सामाजिक सुधार और संविधान आधारित परंपराओं के अनुरूप संपन्न किया। परिवार ने मृत्यु संस्कार से जुड़ी कई प्रचलित परंपराओं का त्याग करते हुए मीठे व्यंजनों और नशापान पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया, जिसकी समाज के लोगों ने खुलकर सराहना की।
जानकारी के अनुसार, 30 जून 2026 को विशाल सूर्यवंशी का परिनिर्वाण हो गया था। अंतिम संस्कार एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम में ग्राम सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन एवं गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
इस अवसर पर ग्राम कोसमंदा के सरपंच संजय रत्नाकर, केंद्रीय ग्राम प्रतिनिधि जी.डी. प्रधान, सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) के अध्यक्ष प्रदीप कुमार चंद्राकर, संगठन के सक्रिय सदस्य पंकज कुमार सूर्यवंशी तथा वरिष्ठ पत्रकार कृष्णा टंडन ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज के संविधान का पालन करने और सभी सामाजिक संस्कारों को नशामुक्त बनाने का आह्वान किया।
परिवार ने बदली परंपरा, दिया समाज को नया संदेश
शोकाकुल परिवार ने दोनिया, तीज नहावान, दस नहावान, सैदानी, अंगराशन एवं बित्सर जैसी पारंपरिक रस्मों का आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया। इसके स्थान पर 6 जुलाई को केवल श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर सादगीपूर्ण तरीके से दिवंगत को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि परिवार ने किसी भी प्रकार की मिठाई या मीठे व्यंजन नहीं बनवाए तथा समाज से भी अनुरोध किया कि कोई भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मीठी सामग्री लेकर न आए। पूरे आयोजन को पूर्णतः नशामुक्त रखा गया। बाहर से आए अतिथियों के लिए केवल सादा भोजन की व्यवस्था की गई और पारंपरिक भोज के स्थान पर सादगी को प्राथमिकता दी गई।
कार्यक्रम में दिवंगत विशाल सूर्यवंशी के छायाचित्र के साथ भारत रत्न, संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का छायाचित्र भी रखा गया। उपस्थित समाजजनों एवं अतिथियों ने दोनों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
ग्राम के सरपंच संजय रत्नाकर ने परिवार के इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ऐसे सुधारवादी प्रयास आने वाले समय में सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव बनेंगे।
S4 ने कहा— परिवर्तन की शुरुआत समाज के सामान्य सदस्य कर रहे हैं
सूर्यवंशी समाज सुधार संगठन (S4) ने शोकाकुल परिवार, ग्राम कोसमंदा के समाजजनों, ग्राम प्रतिनिधियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सामान्य सदस्य जब संविधान के अनुरूप सामाजिक सुधारों को अपनाने लगे हैं, तो यह पूरे समाज के लिए सकारात्मक संकेत है।
संगठन ने समाज के पदाधिकारियों, कार्यकारिणी सदस्यों एवं ग्राम प्रतिनिधियों से भी समाज संविधान का पूर्ण पालन करने की अपील करते हुए कहा कि जब नेतृत्व स्वयं नियमों का पालन करेगा, तब समाज में स्थायी और व्यापक परिवर्तन स्वतः दिखाई देगा।
S4 ने अंत में समाज से सामाजिक कुरीतियों को त्यागकर सादगी, समानता, नशामुक्ति और संविधान आधारित सामाजिक व्यवस्था को अपनाने का आह्वान करते हुए अपना संदेश दोहराया—
“हम सुधरेंगे तभी समाज सुधरेगा, और समाज सुधरेगा तभी परिवर्तन आएगा।”

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